Lyrics
pahali dafa shayari
kaliya monu
न मिली कोई सजा
तेरे जैसी मुझे इस जमाने में
कई बार ठोकर खाई
आपने ही महखाने में
मिल रही हैं मौत मुझे अपने ही
ठिकान पे घुट घुट के जीता आपने
ही आशियाने में
आग ही लगा दी आपने महखाने पे....
दुनिया देखती रही,मिला न में अपने ठिकाने पे
जालिम सी ये दुनिया, दर्द पर मलहम मलने आई देखने के बहाने से.....
टूटा टूटा सा में दिखा, दिखा में अपनी चार पाई पे
हसी तो खुदी पर आई
देख पाया न खुद में आईने में।।
ना मिली कोई सजा
तेरे जैसी मुझे इस जमाने में
कई बार ठोकर खाई
अपने ही महखाने में
दिल की कहानी पूछे,
पूछे कोई हल नी
जुबा तो मीठी, मिले न मीठे पकवान भी
अंदर से टूटा ,मेरे यार का
लगा कोई नाम नी
दुनिया जेसी दिखती
न दिखे मेरा यार भी
एक दो तो अपनी जगह
चार पांच से शुरू करो
एक दो तो बीते कल बात थी
कोई टूटे इश्क में बताना जरा
इश्क से काफी अच्छी पहचान थीं
हम तो लोट कर आए हैं केसे
न जाने वो कोन सी रात थीं
काबिल है यार मेरा भी
मलहम देने की उनकी काफ़ी अच्छी दुकान थी।
पता भूल जो गया न जाने क्यू
जख्मों पर नमक मलने की बात थी.....
नमक मलने की बात थी.....
ना मिली कोई सजा
तेरे जैसी मुझे इस जमाने में
कई बार ठोकर खाई
अपने ही महखाने में
शिकायतो के बोझ से
मतलबी दोस्त से
जिंदगी जी ली मेने
न जाने किस होस में
किस्से के हिस्से मिले
न मिले दोस्त से
काफ़ी शिकायते और
काफ़ी बोझ ने
घर में सुना लगे
क्या
पाया खुद को खो के
अजीब है ये राते क्यू
जिंदगी काफ़ी अच्छी दोस्त थी
न जाने बन बैठी gost क्यू
डर सा गया हूं,
सपनों को दफ़न न करदू
में छोटे छोटे पहलुओं में
में भी न खुद को खो दू
हस्ता हु काफी में भी
अब थोड़ा सा रो लू
चुप न हों जाऊ, खामोशी से
अब थोड़ा सा में सो लू....
अब थोड़ा सा रो लू....
न मिली कोई सजा
तेरे जैसी मुझे इस जमाने में
कई बार ठोकर खाई
आपने ही महखाने में
मिल रही हैं मौत मुझे अपने ही
ठिकान पे घुट घुट के जीता आपने
ही आशियाने में
आग ही लगा दी आपने महखाने पे....
दुनिया देखती रही,मिला न में अपने ठिकाने पे
जालिम सी ये दुनिया, दर्द पर मलहम मलने आई देखने के बहाने से.....
टूटा टूटा सा में दिखा, दिखा में अपनी चार पाई पे
हसी तो खुदी पर आई
देख पाया न खुद में आईने में